उत्पाद प्रमाणन सिंहावलोकन


जनवरी 1947 में, भारतीय मानक संस्थान (आईएसआई), सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में पंजीकृत किया गया था। इसका अधिदेश भारतीय उद्योग के अंगीकरण हेतु मानक तैयार करना और उनका संवर्धन करना था। तत्पश्चात्, भारतीय मानक संस्थान (प्रमाणन मुहर) अधिनियम, 1952 के माध्य से उत्पाद प्रमाणन गतिविधि शामिल करने के लिए इसके अधिदेश का विस्तार किया गया।

सन् 1980 के दशक के मध्य में आईएसआई की कार्य पद्धति को सांविधिक दर्जा प्रदान करने की जरूरत महसूस की गई जिसके परिणामस्वरूप बीआईएस अधिनियम 1986 लागू हुआ। स्पष्ट रूप से परिभाषित सांविधिक शक्तियों सहित मानकीकरण के सुमेलित विकास का संवर्धन करने तथा वस्तुओं की गुणता प्रमाणन हेतु आईएसआई का पुनःनामकरण भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के रूप में किया गया। यह अधिनियम अब बीआईएस अधिनियम के रूप में पुनरीक्षित किया गया है और बीआईएस को राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में स्थापित करता है।

बीआईएस अधिनियम, 2016 और इसके तहत बनाए गए नियम एवं विनियम, बीआईएस को उत्पादों, सेवाओं, पद्धतियों तथा प्रक्रियाओं की अनुरूपता के मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी को लेने हेतु बीआईएस को प्राधिकृत करते हैं। उत्पाद प्रमाणन स्कीम -1 के तहत, बीआईएस, बीआईएस (अनुरूपता मूल्यांकन) विनियम, 2018 में दी गई अनुरूपता मूल्यांकन स्कीमों के अनुसार मानक मुहर का प्रयोग करने हेतु लाइसेंस या प्रमाण पत्र प्रदान करता है। अनुरूपता मूल्यांकन स्कीम बीआईएस (अनुरूपता मूल्यांकन) विनियम, 2018 में दी गई हैं जो आईएस/आईएसओ/आईईसी 17067:2013 के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

बीआईएस की उत्पाद प्रमाणन स्कीमों का लक्ष्य उपभोक्ताओं को उत्पादों की गुणता, सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए तृतीय पक्ष आश्वासन उपलब्ध कराना है। बीआईएस प्रमाणन मुहर की मौजूदगी, जो मानक मुहर के नाम से प्रसिद्ध है, किसी उत्पाद पर इसकी मौजूदगी विशिष्टियों के प्रति अनुरूपता का आश्वासन है। विनिर्माताओं को मानक के प्रति उत्पाद की अनुरूपता सुनिश्चित करने के बाद लाइसेंस-प्राप्त उत्पाद को स्व प्रमाणित करने हेतु अनुमति होती है। ब्यूरो अपने निगरानी प्रचालनों के माध्यम से प्रमाणित वस्तुओं की कड़ी निगरानी बनाए रखता है। मार्केट/फैक्टरी दोनों से लिए गए नमूनों के औचक निरीक्षण तथा परीक्षण द्वारा लाइसेंसी की कार्यकारिता की नियमित निगरानी करने के माध्यम से अनुरूपता सुनिश्चित की जाती है।

प्रमाणन स्कीम राज्य की राजधानियों या प्रमुख औद्योगिक कस्बों में स्थापित किए गए शाखा कार्यालयों के माध्यम से प्रचालित की जाती है और शाखा कार्यालयों के कार्य की देखरेख 5 क्षेत्रीय कार्यालय करते हैं। यद्यपि, यह स्कीम अपने आप में स्वैच्छिक प्रकृति है, जन स्वास्थ्य एवं संरक्षा, सुरक्षा, इन्फ्रास्ट्रेक्चर अपेक्षाओं और बड़े पैमाने पर खपत को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने विभिन्न अधिनियमों के तहत समय समय पर आदेश जारी करने के माध्यम से विभिन्न उत्पादों का अनिवार्य प्रमाणन को लागू किया है। संवर्धित उपभोक्ता संरक्षा तथा सांविधिक प्रावधानों को सुनिश्चित करने के लिए गैस सिलेंडर, रेग्यूलेटर और वाल्व जैसे कुछ उत्पादों के लिए बीआईएस प्रमाणन स्कीम में प्रत्येक लॉट या बैच का उत्पाद के विमोचन से पहले बीआईएस प्रमाणन अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किए जाने की अपेक्षा है।

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